करोना वायरस को चीन का उत्पाद बताया गया है। करोना वायरस केवल पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से ही फैलता है

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धामपुर से मनीष उपाध्याय की रिपोर्ट

केरोना वायरस का आतंक आज पुरी दुनिया में फैला हुआ है | हमारा देश भारत भी इससे अछुता नहीं है | आज इसके प्रभाव से भारत के आम नागरिक ही नहीं बड़े- बडे़ डॉक्टरों सहित भारत सरकार भी चिंतित है | मिडिया में भी आज यह केरोना वायरस छाया हुआ है | खास बात यह है कि यह भी जानकारी में आ रहा है कि अभी तक इसका ठोस ईलाज भी नहीं है | कोरेना वायरस से पिड़ित व्यक्ति की मौत निश्चित है | जैसा कि चीन व अन्य देशों से सुनने में आ रहा है | यह बात को सभी जानते हैं कि मानव जाति का शञु यह वायरस चीन का उत्पाद है | इसको बनाने के पीछे चीन की क्या मंशा रही है यह तो वक्त ही बतायेगा | परन्तु यहॉ पर केरोना के बारे कुछ तथ्यात्मक जानकारी दी जा रही है | आईये जाने कुछ वर्ष पहले टीम कून्टज नामक लेखक ने दी आइस ऑफ डार्कनैस नामक एक पुस्तक का लिखी थी | जिसमें लेखक द्वारा एक ऐसे ही वायरस का उल्लेख किया है | जिसका नाम वुहान -400 बताया गया है |पुस्तक के पृष्ठ संख्या 353 पर स्पष्ट लिखा है कि चीन के किसी वैज्ञानिक ने चीन के शहर वुहान के बाहर स्थित लैब में एक बहुत खतरनाक बॉयलॉजिकल वैपोन का आविष्कार किया था जिसका नाम वुहान शहर के नाम पर वुहान-400 रखा गया | पुस्तक में इसके बारे में लिखा है कि कि यह केवल माञ जीवित मानव बॉडी पर ही प्रभाव ड़ाल सकता है | और इसका प्रसार भी केवल जीवित मानव शरीर से ही हो सकता है | अन्य किसी और माध्यम से इसका प्रसार नहीं हो सकता | इसका अर्थ यह है कि वातावरण या हवा में उक्त वायरस का प्रभाव नहीं है | जैसा कि केरोना के मामले में देखने में आ रहा है | केरोना भी केवल पिड़ित व्यक्ति के सम्पर्क में आने के कारण ही प्रवाहित कर सकता है | यदि इसका प्रभाव वातावरण में भी होता तो इसके प्रभाव से समस्त प्रभावित देशों में हर तरफ लाशों के ढेर लग जाते | कहीं कोरेना वायरस वुहान _ 400 ही तो नहीं है | यदि ऐसा ही है तो इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है | केरोना पिड़ित व्यक्ति के सम्पर्क से दूर रहना ही इसका पेटेंट इलाज है | अधिक जानकारी के लिये पुस्तक दी आई आफ डार्कनैस का अध्यन करें |

इन चीफ विनोद शर्मा

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